हिंदी समाचार
भोपाल के स्कूल छात्रों ने खराब व्यवस्था पर विरोध में पंखे और खिड़कियां तोड़ी
भोपाल के सरकारी स्कूल के छात्रों ने स्कूल परिसर में खराब व्यवस्थाओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने शिकायत की कि उन्हें अत्यंत खराब स्थिति में रखा गया है, और उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें गैर-उचित काम जैसे डायपर साफ करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने गुस्से में आकर पंखे और खिड़कियां तोड़ दीं, जिससे स्कूल में स्थिति और गंभीर हो गई। इस विरोध प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए शिक्षक और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस ने छात्रों को तितर-बितर करने के लिए कार्रवाई की और स्कूल परिसर में शांति बहाल करने की कोशिश की।
छात्रों का यह विरोध प्रदर्शन स्कूल प्रबंधन द्वारा की जा रही उपेक्षा और अव्यवस्थाओं के प्रति उनकी निराशा को दर्शाता है।
अखिलेश यादव ने सीएम योगी के बुलडोजर तंज पर किया पलटवार
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बुलडोजर वाले बयान पर तीखा पलटवार किया है। मुख्यमंत्री योगी ने अक्सर बुलडोजर का उपयोग अवैध निर्माण और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के प्रतीक के रूप में किया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, अखिलेश यादव ने कहा, “बुलडोजर में दिमाग नहीं होता, वो स्टेयरिंग से चलता है। उत्तर प्रदेश की जनता किसी के बुलडोजर का स्टेयरिंग बदल सकती है।”
अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी पर आरोप लगाया कि उन्होंने जानबूझकर उन लोगों पर बुलडोजर चलाया, जिनसे वे व्यक्तिगत रूप से बदला लेना चाहते थे। उन्होंने सवाल किया कि क्या मुख्यमंत्री आवास का नक्शा पास हुआ था, और यदि हां, तो कागज दिखाने की मांग की।
उन्होंने यह भी पूछा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बुलडोजर का उपयोग नहीं किया जा सकता, तो क्या सरकार अब तक चल रहे बुलडोजर के लिए माफी मांगेगी। अखिलेश यादव ने यह आरोप लगाया कि बुलडोजर के माध्यम से लोगों को अपमानित किया गया और उन पर अत्याचार किया गया।
अखिलेश ने कहा कि “दिल और दिमाग” की बात करें, तो वह सिर्फ इतना कहना चाहते हैं कि बुलडोजर में दिमाग नहीं होता, वह केवल स्टेयरिंग से चलता है। उन्होंने यह भी जोड़ते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता उस स्टेयरिंग को बदलने की ताकत रखती है, जो बुलडोजर को नियंत्रित करता है।
सूरत में बाढ़ की गंभीर स्थिति, सामान्य जनजीवन ठप्प
गुजरात के सूरत में स्थिति गंभीर बनी हुई है, जहाँ जिले के कई हिस्से बाढ़ के पानी में डूब गए हैं। इस स्थिति के कारण सामान्य जनजीवन पूरी तरह से ठप्प हो गया है। ड्रोन से ली गई तस्वीरों में क्षेत्र की गंभीर स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है, जिसमें सड़कों, मकानों और अन्य स्थानों पर बाढ़ के पानी का अतिक्रमण दिख रहा है।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने सूरत में अगले सात दिनों तक लगातार बारिश की भविष्यवाणी की है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। बाढ़ के कारण परिवहन, बिजली आपूर्ति और अन्य सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, जिससे स्थानीय निवासियों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन और राहत दल स्थिति को नियंत्रित करने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन भारी बारिश और बाढ़ की चुनौती को देखते हुए स्थिति सुधारने में समय लग सकता है।
पूरा पड़ोस एक पहेली है…जयशंकर ने भारत के जटिल विदेश संबंधों को समझाया
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 30 अगस्त को विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में आयोजित ‘स्ट्रैटेजिक कॉनड्रम्स: रीशेपिंग इंडियाज फॉरेन पॉलिसी’ पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान भारत के जटिल पड़ोसी संबंधों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर, उन्होंने मुस्कुराते हुए टिप्पणी की कि “पूरा पड़ोस एक पहेली है,” जो भारतीय विदेश नीति की जटिलताओं को दर्शाता है।
जयशंकर ने विस्तार से समझाया कि भारत का पड़ोसी क्षेत्र विभिन्न राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियों से भरा हुआ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन जटिल परिस्थितियों में भारत को अपने हितों की रक्षा के लिए सावधानीपूर्वक रणनीति अपनानी होती है। विदेश मंत्री ने बताया कि प्रत्येक पड़ोसी देश के साथ संबंधों में अलग-अलग समस्याएं और संभावनाएं होती हैं, जिनका समाधान करना एक निरंतर चुनौती है।
उनका कहना था कि इन चुनौतियों का सामना करते हुए भारत को अपनी विदेश नीति को समायोजित करना और परिष्कृत करना पड़ता है, ताकि देश की सुरक्षा, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत को अपने पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और संवाद को मजबूत करना होगा, ताकि सभी के लिए लाभकारी संबंध बनाए जा सकें।
जयशंकर ने बांग्लादेश के राजनीतिक बदलावों पर चिंता जताई
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में बांग्लादेश में हो रहे विघटनकारी राजनीतिक बदलावों की ओर संकेत दिया है। उनका कहना था कि बांग्लादेश में राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं, जो कि विघटनकारी हो सकते हैं। जयशंकर ने इस बात को स्वीकार किया कि बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिरता को लेकर कुछ चिंताएं हैं और वहां की स्थिति पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि इन बदलावों के बावजूद दोनों देशों के बीच रिश्तों में पारस्परिक हितों की महत्वपूर्णता को समझना और ध्यान में रखना होगा। उनका मानना है कि चाहे राजनीतिक स्थिति कैसी भी हो, दोनों देशों के बीच सहयोग और समझौते के लिए प्रयास जारी रखने की आवश्यकता है। यह भी महत्वपूर्ण है कि बांग्लादेश में हो रहे बदलावों का प्रभाव भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर न पड़े और दोनों देशों के हितों की रक्षा की जा सके। जयशंकर के इस बयान से स्पष्ट होता है कि वे बांग्लादेश में हो रहे राजनीतिक परिवर्तनों के प्रति सजग हैं और दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत बनाए रखने की दिशा में काम कर रहे हैं।
सूरत में छह दिवसीय नेशनल सिल्क एक्सपो का आयोजन
– नेशनल सिल्क एक्सपो में तरह-तरह के डिजाइन के साथ अच्छी क्वालिटी की साड़ी, सूट और कपड़े होंगे उपलब्ध
– राखी स्पेशल कलेक्शन
सूरत। सूरत के सिटीलाइट स्थित महाराजा अग्रसेन भवन में छह दिवसीय नेशनल सिल्क एक्सपो आयोजित किया गया है। 15 अगस्त से शुभारंभ होनेवाले नेशनल सिल्क एक्सपो में महिलाओं के लिए सिल्क, कोटन साड़ी, डिजाइनर एथेनिक ड्रेस, ड्रेस मटेरियल्स, होम लिनन सहित अलग अलग वेरायटिया एक जगह उपलब्ध होगा। 15 से 20 अगस्त तक चलने वाला यह नेशनल सिल्क एक्सपो सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहेगा। इसकी खासियत है कि इसमें पूरे भारत से 150 से ज्यादा मास्टर वीवर्स और श्रेष्ठ डिजाइनर्स की कारीगरी आपको देखने को मिलेंगी।
शादी और रक्षाबंधन सीजन के लिए स्पेशल साड़ी और सूट नई डिजाइन के साथ लेटेस्ट वेरायटी उपलब्ध है। साथ ही साथ 40 प्रतिशत तक का डिस्काउट भी मुहैया करवाया जाएगा। यहां तरह-तरह के डिजाइन के साथ अच्छी क्वालिटी की साड़ी, सूट और कपड़े हैं। एक जगह पर कई राज्यों के बुनकरों द्वारा तैयार कपड़े का काउंटर लगाए जाएंगे। जिससे कि अलग -अलग दुकान में खरीदारी करने की झंझट से मुक्ति मिलेगी। “अलग-अलग डिजाइन का अलग-अलग रेट है, जो लोग खरीदारी कर रहे हैं अपने बजट के अनुसार खरीदारी कर सकेंगे। साथ ग्राहकों को भुगतान करने के लिए डिबेट कार्ड , क्रेडिट कार्ड सहित कई विकल्प उपलब्ध होंगे।
नेशनल सिल्क एक्सपो में बिहार, आसाम, ओडि़सा, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तमिलनाडू, तेलंगाणा, छत्तीसगढ, जम्मू और कश्मीर, आंध्र प्रदेश से लोकप्रिय वैरायटी की साड़ियां एवं ड्रेस मटेरियल उपलब्ध होंगे। जिसमें तरह तरह के डिजाइन्स, पैटन्स, कलर कॉम्बिनेशन है। जिसमें 15 हजार से लेकर 2 लाख तक की गुजरात की डबल इक्कत हैडमेड पटोला साड़ी उपलब्ध है, जो आठ महीने में तैयार होती है। इसे दो बार बुना जाता है। तमिलनाडू की प्योर जरी वर्क की कांजीवरम साड़ी भी महिलाओं को लुभाएगी।
बनारस के बुनकर अपनी साड़ीयों को नए जमाने के हिसाब से लोकप्रिय बनाने के लिए कई तरह के प्रयोग करते रहते हैं। कभी वे बनारसी साड़ीयों पर बाग की छपाई करवाते है तो अब वे बनारसी सिल्क साड़ीयों पर महाराष्ट्र की पैठणी साड़ीयों के मोटिफ बुन रहे हैं। वैसे पारंपरिक बनारसी जरी और कढ़वा बूटी साड़ीयों से लेकर तनछोई सिल्क तक कई तरह की वैरायटी एक हजार से लेकर पांच हजार तक इस सेल में मिल रही है।
रेशम की बुनाई के लिए मशहूर बिहार के भागलपुर से कई बुनकर शादी सीजन जैसे खास मौके पर पहने जाने वाले कुर्ता व पायजामा के लिये खास हाथ से बने हुये भागलपुर सिल्क व मोदी जैकेट का कपड़ा भी उपलब्ध है। तमिलनाडु की प्योर जरी वर्क की कांजीवरम साड़ी भी महिलाओं का पसंद आ रही है। सोने और चांदी के तारों से बनी इस साड़ी को कारीगर 30 से 40 दिन में तैयार करते हैं जिसकी कीमत 5 हजार से शुरु होकर 2 लाख होती है।
बनारसी और जमदानी सिल्क, कांचीपुरम, बिहार टसर, भागलपुर सिल्क, गुजरात बंधिनी और पटोला, पश्चिम बंगाल का बायलू, कांथा, हेंड पेंटेंड साडी, ढाकाई जमदानी, पैठनी, एमपी चंदेरी, महेश्वरी, एरी साड़ी, शिबोरी और अजरक प्रिंट, हेन्ड कलमकारी, राज्सथान ब्लोक प्रिन्ट, छत्तीसगढ कोसा और खादी सिल्क साडी और ड्रेस मटेरियल उपलब्ध होगा। मैसूर सिल्क साड़ीयों के साथ ही क्रेप और जॉर्जेट सिल्क, बिहार का टस्सर सिल्क, आन्ध्रा प्रदेश का उपाड़ा, उड़ीसा का मूंगा सिल्क भी सूरत के सिटीलाइट स्थित महाराज अग्रसेन भवन में उपलब्ध है।
पैर से तीर चलाने वाली पहली महिला: शीतल देवी की प्रेरणादायक कहानी
शीतल देवी, एक ऐसी धुरंधर तीरंदाज हैं जो अपने पैरों से तीर चलाकर रोजाना 300 तीर चलाती हैं। उनकी इस अनोखी मेहनत का फल उन्हें पैरा एशियाड में दो स्वर्ण पदक जीतकर मिला है। अब शीतल का अगला बड़ा सपना पेरिस पैरालम्पिक में देश के लिए शीर्ष स्थान हासिल करना है।
शीतल देवी ने तीरंदाजी की दुनिया में इतिहास रच दिया है। वह पैर से तीर चलाकर पदक जीतने वाली विश्व की पहली महिला बन गई हैं। इसके बाद, उन्होंने पैरा विश्व तीरंदाजी रैंकिंग में महिला कंपाउंड ओपन वर्ग में शीर्ष तीरंदाज का स्थान हासिल किया। यह उपलब्धि न केवल उनके असाधारण कौशल का प्रमाण है, बल्कि उनके दृढ़ संकल्प और संघर्ष की कहानी भी बयां करती है।
नई दिल्ली में ‘बीइंग यू’ किताब के कवर लॉन्च के मौके पर, शीतल ने बताया कि वह पैरालम्पिक में पदक जीतने के लिए पुरजोर अभ्यास कर रही हैं। उनकी यह सफलता उन्हें और भी ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित कर रही है। शीतल का यह सफर संघर्ष, साहस और दृढ़ संकल्प की अद्वितीय मिसाल है।
शीतल देवी की यह प्रेरणादायक यात्रा हमें सिखाती है कि जब जुनून और मेहनत का मेल होता है, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। उनकी कहानी हर किसी के लिए प्रेरणा है, यह दिखाती है कि कैसे एक व्यक्ति अपनी सीमाओं को पार कर सकता है और असंभव को संभव बना सकता है। शीतल का संकल्प और साहस हमें याद दिलाता है कि सच्ची मेहनत और लगन से कोई भी बाधा पार की जा सकती है।
हिमा दास को सलाम और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएँ!
क्या आप जानते हैं कि भारत की धरती पर एक ऐसी बेटी ने जन्म लिया है जिसने दौड़ के मैदान में देश का नाम रोशन किया है? हम बात कर रहे हैं हिमा दास की, जिन्होंने अपने अदम्य साहस और मेहनत से भारतीय एथलेटिक्स में एक नया इतिहास रचा है।
हिमा दास का जन्म असम के नगाँव जिले के धींग गांव में हुआ था। एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली हिमा ने अपने सपनों को पंख देने के लिए कई कठिनाइयों का सामना किया। उनके पास न तो उच्च कोटि के प्रशिक्षण की सुविधाएँ थीं और न ही अच्छे संसाधन, लेकिन उनकी लगन और जुनून ने उन्हें कभी हार मानने नहीं दी।
2018 में आईएएएफ वर्ल्ड अंडर-20 एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में हिमा दास ने इतिहास रच दिया। 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में उन्होंने 51.46 सेकेंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता और इस उपलब्धि के साथ वे यह कारनामा करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गईं। यह जीत न केवल हिमा के लिए बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का क्षण था।
हिमा दास की कहानी संघर्ष, साहस और समर्पण की अद्वितीय मिसाल है। उनकी यह यात्रा हमें सिखाती है कि जीवन में कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं, अगर हम दृढ़ निश्चय और मेहनत के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ें, तो हम हर बाधा को पार कर सकते हैं।
हिमा दास ने न केवल अपने सपनों को साकार किया, बल्कि उन्होंने अन्य युवाओं को भी प्रेरित किया है कि वे अपने सपनों का पीछा करें और उन्हें हकीकत में बदलने का प्रयास करें। उनकी कहानी उन सभी के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं।
पुनीत इस्सर: दुर्योधन से बिग बॉस तक की अद्भुत यात्रा
पुनीत इस्सर भारतीय सिनेमा और टेलीविजन के एक प्रतिष्ठित अभिनेता, निर्देशक और पटकथा लेखक हैं। उनका जन्म 6 सितंबर 1958 को पंजाब, भारत में हुआ था। अपने अद्वितीय व्यक्तित्व और दमदार अभिनय के लिए जाने जाने वाले पुनीत इस्सर ने भारतीय सिनेमा में एक खास मुकाम हासिल किया है।
पुनीत इस्सर ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1983 में फिल्म “कुली” से की थी, जिसमें उन्होंने खलनायक की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म के दौरान एक दुखद दुर्घटना हुई, जिसने अमिताभ बच्चन को गंभीर रूप से घायल कर दिया था। इस घटना के बावजूद, पुनीत ने अपने अभिनय कौशल से दर्शकों का ध्यान खींचा और भारतीय सिनेमा में अपनी जगह बनाई।
हालांकि, पुनीत इस्सर को असली पहचान और प्रसिद्धि टीवी धारावाहिक “महाभारत” में दुर्योधन के किरदार से मिली। बी. आर. चोपड़ा द्वारा निर्देशित इस महाकाव्य में उनके दमदार अभिनय और प्रभावशाली संवाद अदायगी ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। दुर्योधन के किरदार में उनकी बॉडी लैंग्वेज, आंखों की चमक, और संवाद अदायगी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी यह भूमिका इतनी प्रभावशाली थी कि आज भी लोग उन्हें दुर्योधन के नाम से जानते हैं।
महाभारत के बाद, पुनीत इस्सर ने कई हिंदी फिल्मों में काम किया और अपनी बहुआयामी प्रतिभा से दर्शकों का दिल जीता। वे एक अच्छे अभिनेता होने के साथ-साथ एक कुशल निर्देशक और लेखक भी हैं। उन्होंने “गर्व: प्राइड एंड ऑनर” (2004) जैसी फिल्मों का निर्देशन किया, जिसमें सलमान खान मुख्य भूमिका में थे। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी सफलता प्राप्त की और दर्शकों से सराहना भी मिली।
पुनीत इस्सर ने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण फिल्मों में काम किया है। “रॉकी” (1981), “कुली” (1983), “कर्मा” (1986), “त्रिदेव” (1989), “रॉ वन” (2011), और “चेन्नई एक्सप्रेस” (2013) जैसी फिल्मों में उनकी भूमिकाएं सराहनीय रही हैं। उन्होंने अपने अभिनय कौशल से हर किरदार को जीवंत बना दिया और अपने दर्शकों को हमेशा कुछ नया दिया। उनकी विविधता और गहराई ने उन्हें फिल्म उद्योग में एक मजबूत और असाधारण कलाकार बना दिया।
फिल्मों के अलावा, पुनीत इस्सर ने टेलीविजन पर भी अपनी पहचान बनाई। “महाभारत” के अलावा उन्होंने कई अन्य टीवी शोज़ में भी काम किया। वे “बिग बॉस” के 8वें सीजन में भी नजर आए थे, जहां उनकी सख्त छवि और सटीक टिप्पणियों ने उन्हें दर्शकों के बीच और भी लोकप्रिय बना दिया।
नाडा हाफिज: गर्भावस्था में ओलंपिक का साहसिक सफर
नादा हाफिज मिस्र के काहिरा से हैं और उन्होंने तीन ओलंपिक खेलोंलंदन, टोक्यो और अब पेरिस में अपने देश का प्रतिनिधित्व किया हैं। दिलचस्प बात यह है कि तलवारबाजी शुरू करने से पहले, हाफिज एक जिमनास्ट थीं और उन्होंने मिस्र की जिमनास्टिक चैंपियन का खिताब भी जीता था। इसके अलावा, उनके पास चिकित्सा की डिग्री भी है।हम बात कर रहे हैं मिस्र की महिला तलवारबाज नाडा हाफिज का जिन्होंने पेरिस ओलंपिक में हिस्सा लिया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि वह टूर्नामेंट के दौरान 7 महीने गर्भवती थीं। इसके बावजूद उन्होंने टूर्नामेंट में हिस्सा लिया और अपने पहले मुकाबले में जीत भी हासिल की
सोशल पोस्ट से किया खुलासा मिस्र की 26 वर्षीय ने नाडा ने व्यक्तिगत प्रतियोगिता में अपना पहला मैच जीता, लेकिन वह अंतिम 16 के मुकाबले में बाहर हो गई। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘मेरे गर्भ में एक लिटल ओलंपियन पल रहा है। मेरे बच्चे और मैंने अपनी चुनौतियों का सामना किया। भले ही यह शारीरिक और भावनात्मक हों। प्रेग्नेंसी अपने आप में इतनी कठिन यात्रा होती है। जिंदगी और खेल के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए संघर्ष करना बहुत मुश्किल था।’ आगे उन्होंने पोस्ट लिखने के कारण को बताते हुए कहा कि ‘मैं पोस्ट यह बताने के लिए लिख रही हूं कि राउंड-16 में जगह पक्की करने के बाद मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है।
मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे अपने पति और अपने परिवार का भरोसा मिला, जिससे मैं यहां तक पहुंच पाई। मैं तीन बार ओलंपियन रही, लेकिन यह ओलंपिक अलग था, क्योंकि इस बार एक छोटा ओलंपियन मेरे साथ है। इस हार के बाद मिस्र की फेंसर नाडा की इंस्टाग्राम पोस्ट ने दुनियाभर में सुर्खियां बटोरीं